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महिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र, सुड़िंयाॅ कुआ, बशारतपुर, गोरखपुर सन् 1987 में स्थापित, सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 21-1860 के अन्तर्गत सन् 1991 में पंजीकृत संस्था है। संस्था गोरखपुर शहर की मलिन बस्ती सुड़ियां कुआॅ बशारतपुर में स्थापित एक सामाजिक संस्था है, जिसके कार्य क्षेत्र के अन्तर्गत गरीब महिला/पुरूष, विधवा, विकलांग, परित्यक्त बीमार, अनपढ-गवांर, हर समुदाय, माता-पिता विहिन बच्चे, वृद्ध को आर्थिक दृष्टि से सुद्धढ़ बनाने, न्याय दिलाने, प्रशिक्षित कर रोजगार में लगाने, नशा उन्मुलन, आदि सामाजिक सरोकार रखने वाले कायों में लगी हुई है। वर्तमान समय में संस्था गोरखपुर व देवरिया जनपद में हस्तशिल्पियों के उत्थान व व हस्त शिल्प के विकास तथा कृषि क्षेत्र में किसानों के हित में खेतों में नये शोधित बीज प्रयोग करने हेतु जागरूकता फैलाने के कार्य में संलग्न है। संस्था द्वारा सामाजिक कुरितियों, बिमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने में लगी हुई है। आज बेरोजगारी की समस्या सरकार के सामने प्रश्न चिन्ह बनकर मुह चिढ़ा रही है। ऐसे में संस्था रोजगार परक प्रशिक्षण के माध्यम से बेरोजगार को रोजगार से जोड़ने के महान कार्य में लगी हुई है। संस्था द्वारा कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में भी निरन्तर कार्य किए जा रहे है। समूह की आवधारणा व अल्प बचत समूह की कल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। युवाओं/युवतियों के विकास हेतु कई प्रकार की योजनाएॅ संचालित है और कुछ संचालन के लिए तैयार है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा,भूकम्प आदि के प्रति लोगों को सचेत करने, जान माल की रक्षा करने, प्रभावित लोगों को सहायता दिलाकर उन्हें व्यस्थित करने के कार्य में लगी हुई है। संस्था अपने उद्देश्य पूर्ति हेतु सर्वथा जागरूक है, संस्था अपने उद्देश्य पूर्ति में सतत् प्रयत्न शील है। संस्था द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय व शहरी-गरीब महिलाओं के लिए भी कार्य किये जा रहे हैं। वर्तमान वर्श में संस्था द्वारा कराये गये कार्यो का विवरणः- 1. कृषक जागरूकता शिविर- संस्था द्वारा गोरखपुर व देवरिया के सुदूंद ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को जागरूक बनाने हेतु कई ग्राम सभाओं में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित किसानों को शोधित नये बीज का प्रयोग करने, वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग करने खेती के लिए नये अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग करने आदि कृषि से सम्बन्धित जानकारियाॅ दी गयी। संस्था द्वारा देवरिया जनपद के मस्टोडरगिर मठिया,घमउर परशुराम, भटवलिया, गौरीबाजार में तथा गोरखपुर जनपद के माल्हनपार, पिडिया, भसुरिया, बांसगाॅव, सिकरीगंज, चैरीचैरा में इस प्रकार के शिविर का आयोजन किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है किसानों को जागरूक कर व खेती के लिए नयी तकनीक विकसित कर ही इसे विकसित देशों की श्रेणी में लाया जा सकता है। संस्था द्वारा पूसा कृषि अनुसंधान केन्द्र से सहयोग लिया जा रहा है, पैदावार बढाने के लिए किसानों को नये शोधित बीज का प्रयोग कराया जा रहा है। 2.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमः-जीवन के लिए स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण स्थान है। बीमार मानव, बीमार उद्योग, बीमार मशीन, बीमार देश कभी विकास नहीं कर सकता। इसी प्रकार परिवार कल्याण की अवधारणा देश परिवार के विकास के लिए आवश्यक है। संस्था द्वारा गोरखपुर व देवरिया जनपद के कई ग्राम सभाओं में स्थास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रम का आयोजन कराया गया। गोरखपुर के उरूवाॅं, पिड़िया, खोराबार ब्लाक तथा देवरिया में गौरीबाजार, लार रोड, भटवलिया, भलुअनी,मस्टोडरगिर में आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीमारी से पीड़ित लोगों को मुफत दवाॅए, गभवती महिलाओं को व वृद्धों को मुफ्त टानिक, विवाहित महिलाओं गर्भाधान रोकने हेतु कण्डोम एंव दवाओं का वितरित किया गया। ग्रामीणों को खसरा, एडस, हेपेराइटिस, चेचक, इन्सेफलाइटिस, कैंसर आदि बिमारियों की जानकारी दी गयी । इन बिमारियों के कारण, लक्षण, व बचाव के बारें में भी विस्तार से बताया गया। इन कार्यक्रमों में डा0 राजेन्द्र सिंह, डाॅ0 कुन्दन सिंह के साथ नर्स, निर्मला एवं प्रेमलता आदि ने संस्था को अपना सहयोग प्रदान किया। 2. बाल अपराध एवं रोकथाम- इस स्पर्धा युग में लोगों की बढ़ती व्यवस्ता के चलते रिस्ते नाते बेमानी होते चले जा रहे है। इसके चलते ही सामाजिक कुरीतियों की चलन भी बढ़ती जा रही है, आगे बढ़ने की होड़ में मानव छल, बल, कल, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी का सहारा लेने में अपना गौरव समझने लगा है। शहर हो या गाॅव पैसे की खनक ने सबको मदहोस कर रखा है। इस खनक के पीछे लोग देश की आन बान शान तक को बट्टा लगाने से नहीं चूक रहे है। आज के इस भागम-भाग युग में बच्चों की तरफ ध्यान देने की फूर्सत नहीं है। पैसे वाले हो, गरीब हो, सबका एक ही हाल है। ऐसे में बच्चें अभिभावक की देख-रेख के अभाव में गलत संगत मंे पड़कर बिगड़ जा रहे है। आज चार पाॅच वर्ष के लड़के/लड़कियों के साथ दुराचार की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों को बिगाड़ने में कभी-2 माता-पिता का भी हाथ होता है। धनाठ्य लोग पैसे से सबकुछ खरीद लेने की हेकड़ी रखते है। बच्चों को आवश्यकता से अधिक धन देना उन्हें बिगाड़ने में सहायक होता है। बाल अपराध को रोकने हेतु संस्था द्वारा गोरखपुर शहर के सुड़िया कुआॅं, बिछिया व उत्तर टोला मलिन बस्तियों में शिविर का आयोजन किया गया था। संस्था द्वारा शिविर के माध्यम से गरीब परिवार के लोगों को यह बताया गया कि बच्चे परिवार ही नहीं देश के भविष्य हैं। हमें उनकी तरफ से आॅखें खुली रखनी चाहिए। संस्था द्वारा पतरैठा ग्राम सभा में भी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। बच्चा कच्ची मिट्टी का घड़ा है उसे सहारना बहुत जरूरी है। माता पिता के साथ साथ समाज की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह आस पास के बच्चों को सही राह दिखाने में मदद करें। आज के बच्चों के भविष्य के साथ ही देश का भविष्य जुड़ा है, हमें इस तरफ विशेष ध्यान देना होगा। 3. प्रशिक्षण कार्यक्रम- समय को आधार मानकर प्रशिक्षण को तीन भागों में बाॅटा गया हैंः- (क) पूर्ण कालिक प्रशिक्षण (ख) अल्पकालिक प्रशिक्षण (ग) एक दिवसीय प्रशिक्षण (क) पूर्ण कालिक प्रशिक्षणः- इसके अन्तर्गत एक वर्षीय प्रशिक्षण को रखा गया है। इसमें सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, पेंटिंग, कुकिंग, नकली आभूषण, साफ्ट टवायज, जूट क्राफ्ट पैच वर्क, जरी जरदोजी, इम्ब्राइडरी, पी0ओ0पी क्राफ्ट, टाइप एण्ड शार्ट हैण्ड, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, टेराकोटा प्रशिक्षण, कुरेशिया, इलेक्ट्रिानिक्स, आदि व्यवसायिक प्रशिक्षण एक वर्षीय प्रशिक्षण है। संस्था की गोरखपुर शहर में गंगानगर, सुड़ियाकुआॅ, अंधियारीबाग में तथा ग्रामीण क्षेत्र में माल्हनपार, तथा भटौली बाजार में यह प्रशिक्षण चलाया जाता है। इस वर्ष कुल मिलाकर 600 से अधिक महिलाओं ने भिन्न-2 ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। (ख) अल्पकालिक प्रशिक्षणः- इस प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था लोगों की मांग पर एक माह, दो माह या छः माह के लिए की जाती है। इसके लिए गाॅव या शहर के इच्छुक लोगों का प्रस्ताव आता है। संस्था के पदाधिकारी प्रस्ताव पर विचार करते हैं और तब प्रशिक्षण चलाने की स्वीकृति दी जाती है। इस वर्ष गोरखपुर के ग्राम बढ्यापार व ग्राम दुबौली में इस प्रकार के प्रशिक्षण चलाये गये जो तीन माह के लिए था। इस वर्ष को 150 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। (ग) एक दिवसीय प्रशिक्षणः- आंशिक रूप से प्रशिक्षित प्रशिक्षार्थियों हेतु इस प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद के गुणवत्ता एवं डिजाइन एवं तकनीक की जानकारी दी जाती है। 2014-15 में चरगाॅवा व जंगल कौड़िया में जूट क्राफ्ट ट्रेड की टेक्निकल प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया गया जिसमें 150 से अधिक महिलायें लाभान्वित हुई। 4. हस्तशिल्प विकास योजना कार्यक्रम - हमारा देश विविधताओं का देश है। भारत के प्रान्तों की जलवायु, प्रकृतिक बनावट, खान पान, रहन-सहन, पहनावा, बोली-भाषा, त्योहार आदि पूर्णत भिन्न है। जिस प्रकार सभी प्रान्तों की उपयुक्त बाते भिन्न है उसी प्रकार यहाॅ का हस्तशिल्प भी वहाॅ की स्थिति के अनुसार भिन्न है। उ0प्र0 का पूर्र्वी भाग आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के वावजूद भी हस्तशिल्प के क्षेत्र में धनी है। यह भी सच है कि यहाॅ के लोग हस्तशिल्प की कीमत नहीं समझते जिससे हस्तशिल्पी अपने शिल्पों को रोजगार से जोड़कर नहीं देख पाते। भारत सरकार लुप्त प्राय हो रहे हस्तशिल्प को पुनः जीवित करने के नये क्लेवर प्रदान कर रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयासरत है। इसके लिए प्रशिक्षण, तकनीकी प्रशिक्षण, डिजाइनव तैयार उत्पाद को बाजार प्रदान करना आदि शामिल है। संस्था सन् 2010 से देवरिया जनपद के शहरी क्षेत्र के भटवलिया, नेहरूनगर, न्यू कालोनी नगर, सोमनाथ नगर, रामनाथनगर, अबु बकरनगर तथा ग्रामीण क्षेत्र में परशुराम धमऊर, हाटा ब्लाक के मठिया गाॅव में तथा रामपुर कारखाना क्षेत्र के कई गावों में हस्तशिल्प विकास येाजना का काम चल रही है। इसके अन्तर्गत संस्था द्वारा 625 शिल्पी महिलाओं को जोड़ा गया है उन्हें 13-13 के समूह में रखकर हर समूह को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने का कार्य चल रहा है। इसके अन्तर्गत शिल्पियों को नई तकनीक की जानकारी भी दी जाती है, और बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है। संस्था द्वारा तैयार माल की बिक्री के लिए गोरखपुर में हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें कुल 20 समूह की महिलाओं ने हिस्सा लिया। इसके अन्तर्गत हस्तशिल्पियों का कार्ड बनवाया गया तथा उनका जीवन बीमा (आम आदमी बीमा येाजना के अन्तर्गत) भी कराया गया। समय समय पर शिल्पियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर दवा भी वितरित किया गया। संस्था हस्तशिल्प विकास के प्रति सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रही है। हस्तशिल्प प्रदर्शनी- शिल्पकारों को उनके शिल्पों को उचित बाजार देने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता हैं। संस्था द्वारा आयोजित या अन्य माध्यम से आयोजित प्रदर्शनियों में स्टाल लगाने हेतु शिल्पियों को उनके शिल्पों के साथ भेजा जाता है। 2014-15 में संस्था द्वारा नवम्बर व जनवरी गोरखपुर में व उ0प्र0 राज्य के देवरिया में फरवरी के अन्तिम सप्ताह में हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। संस्था द्वारा शिल्पकारों को उनके शिल्पों के साथ बगलौर, हैदराबाद, झाॅसी, दिल्ली, इलाहाबाद, गोपालगंज, वाराणसी, आगरा, जैसी जगहों पर प्रदर्शनी में स्टाल लगाने के लिए भेजा गया। शिल्पकारों ने अवसर का लाभ उठाया। उन्हें जगह-2 के शिल्पकारों से परिचित होने का मौका भी मिला और साथ ही बाजार भी मिला। बहुत सारे आर्डर भी प्राप्त हुए। जूट बैंग एवं जूट क्राफ्ट प्रशिक्षण व उत्पादन योजना- सन् 2014-15 में संस्था ने गोरखपुर व देवरिया जनपद के आठ ब्लाक चैरी-चैरा, खोराबार, चरगाॅवा, व ब्रहमपुर, भटवलिया, रामपुर कारखाना, देवरिया सदर में आठ समूह के माध्यम से महिलाओं को जूट बैग बनाने का 21 दिवसीय प्रशिक्षण दिलाया गया साथ ही दोनों जनपद के एक एक समूह को जूट क्राफ्ट (झूला, पावदान, सिकहर, चटाई, टी पाट) आदि का 21 दिवसीय प्रशिक्षण दिलाया गया जिसमें 250 महिलाएॅ प्रशिक्षित हुई। समूहों द्वारा तैयार बैग व जूट क्राफ्ट को प्रदर्शनी के माध्यम बाजार भी प्रदान किया गया। आज उत्पादों की मांग को देखते हुए आर्डर के आधार पर उत्पाद सप्लाई किया जाता है। महिलाएॅ रोजगार से जुड़कर धनोपार्जन करने लगी है। उपभोक्ता संरक्षण कार्यक्रम- उपभोक्ता को मल्टीनेशनल कम्पनियों के उत्पादांे से सावधान करने के लिए संस्था द्वारा 2014-15 में बांसगाॅव, उरूवा बाजार, कौड़ीराम, सिकरीगंज व उनवल बाजार में भिन्न-2 तिथियों को उपभोक्ता को जागरूक व संरक्षित बनाने हेतु जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया इसी प्रकार संस्था द्वारा देवरिया जनपद के परशुराम धमउर, बैतालपुर व गौरीबाजार में जागरूकता शिविर का आयोजन कर उपभोक्ता को जागरूक बनाने की दिश मंे प्रयत्न किया गया। 1. ग्रामीण विकास कार्यक्रम- भारत गाॅवों का देश है। भारत की 60 प्रतिशत जनसंख्या आज भी गाॅवों में ही निवास करती है। प्राकृतिक आपदा के चलते फसले नष्ट होती रहती है जिससे बचाव के लिए संस्था ने शिविर के माध्यम से फसल बीमा की जानकारी दी। ग्रामीण स्वच्छता की दृष्टि से घर-2 शौचालय बनाने के प्रति लोगों को जागरूकता किया गया। जलापूर्ति के लिए इण्डिया मार्का नल लगाने पर जोर, खेतों में रासायनिक खादों की जगह बर्मी कम्पोस्ट खाद के प्रयोग पर जोर, ग्रामीण को रोजगार परक खेती करने पर जोर, गरीब बेसहारा बच्चेजो धनाभाव के कारण स्कूल नही जा पाते उन्हें शिक्षित बनाने पर जोर। संस्था द्वारा किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु नये नये शोधित बीजांे के प्रयोग पर जोर दिया गया। गरीबी उन्मुलन कार्यक्रमः- संस्था गरीबों को रोजगार से जोड़कर उनके उत्थान के प्रति सजग है। निरन्तरता बनी हुई है। संस्था द्वारा सन् 2014-15 में गोरखपुर के परसिया, लोनाव व दरहम्रदेवा में सिलाई कढ़ाई, बुनाई का प्रशिक्षण चलाया गया जिसमें 120 के करीब महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। गरीब भी इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं। संस्था निरन्तर इस प्रयास में लगी है कि गाॅव या शहर के गरीब स्वयं सहायता समूह बनाकर कोई भी काम शुरू करे और रोजी रोटी कमायें। संस्था का प्रयत्न साकार रूप ले रहा है, गरीब आगे बढ़ रहे है। प्रदूषण जागरूकता शिविर- हमारे देश में प्रदूषण एक भारी समस्या बनी हुई है। रोज नई-2 बिमारियाॅं जन्म ले रही है। संस्था ने जागरूकता शिविर के माध्यम से प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने हेतु भिन्न-2 उपाय सुझाव गये। लोगों ने स्वीकार किया कि प्रदूषण का बढ़ना जीवन हित में नहीं है। हम हरे पौधे लगाये, कचरा एक स्थान पर डाले, प्लास्टिक का प्रयोग न करें। घूंएॅं से बचाव के लिए नाक बाॅधकर चले आदि। प्रदूषण से जल, थल, वायु सव प्रभावित है और यही तीन हमारा जीवन भी है। इसलिए हमें औरों के लिए नहीं वरन अपने हित के लिए प्रदूषण से बचाव करना आवश्यक है। पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम- दूषित पर्यावरण मानव,जीव, जन्तु सबके लिए हानि कारक है। असन्तुलित पर्यावरण के चलते तापमान बढ़ रहा, गलेसियर पिघलते जा रहे है, समुद्र का जलस्तर उठता जा रहा है। पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए मानव को अपनी महत्वकांक्षा में कमी लानी होगी। संस्था द्वारा देवरिया के मस्टोडरगिर में आयोजित जागरूकता शिविर में इस ज्वलन्त विषय पर चर्चा की गयी व लोगों को इसके प्रति जागरूकत किया गया। 26 जनवरी 2015 को गंगानगर, में उपर्युक्त विषयक शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 250 महिलायें उपस्थित रही। पर्यावरण अर्थात परि$आवरण। हमारे चारों तरफ प्रकृति द्वारा एक ऐसा आवरण चढ़ाया गया रहता है जो हमें गर्मी, जाडा, बरसात, हवा, आंधी, तूफान, ओलावृष्टि, भूकम्प आदि से हमारी रक्षा करता है। हवा और पानी का हमाारे जीवन से सीधा संबंध होता है। दूषित पर्यावरण हमारे जीवन के लिए अत्याधिक घातक है। फैक्ट्यिों, वाहनों, इन्जनों से निकलने वाले धूएं व हार्न की आवाजों से हवा में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। जनसंख्या वृद्धि के साथ साथ प्रदूषण का प्रभाव भी तेजी से बढ़ रहा है। जानवर कम होेते जा रहे है, पानी का स्तर नीचे गिरता जा रहा है, पहाड़ियाॅ गंजे सिर के समान होती जा रही है। पर्यावरण की चिंता आज पूरे विश्व को प्रभावित किए हुए है। हम दिन प्रतिदिन बिमारियों के जाल में फसते जा रहे है। यह स्थिति चिंता योग्य है। नित नये आविष्कार, नये प्रयोग से भी समस्याए बढ़ रही है। धूंआ, कचरा, गंदगी, वाहनों व फैक्टीयों से उत्सर्जित गैस आदि से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है हम न चाहते हुए भी विनाश की ओर बढ़ते जा रहे हैं। पुस्तकालय संचालन- संस्था द्वारा गोरखपुर शहर के सुड़िया कुआ, गंगानगर, अधियारीबाग तथा देहात क्षेत्र में माल्हनपार बाजार, गौरखास व भटौली बाजार में पुस्तकालय संचालित है। इससे क्षेत्र के लोगलाभ उठा रहे। पुस्तकालयों पर राष्ट्ीय स्तर के दैनिक समाचार पत्र, मासिक पत्रिकाए, समाचार भी आते रहते हैं। इस समय संस्था संचालित पुस्तकालय में कुल 10 लाख मूल्य से उपर की पुस्तकें उपलब्ध है जिसमें साहित्यिक, सामाजिक, व्यावसायिक पुस्तकें है जो लोगों को लाभ पहुचाने में सक्षम है। सभी केन्द्रों पर नियमित रूप से अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, समाचार पत्र व इंडिया टूडे तथा संगिनी मासिक पत्रिका मंगाई जाती। सड़क सुरक्षा- आज बढ़ते वाहनों के दौर में सड़क सुरक्षा नियमों को जनज न तक पहुचाना आवश्यक होता जा रहा है। आये दिन दुर्घटनायें हो रही है। संस्था द्वारा उरूवा बाजार, गौर खास व भइसां बाजार में शिविर लगाकर लोगों को सड़क सुरक्षों के बारे में जानकारी दी गयी । सड़क सुरक्षा नियमों से सम्बन्धित वैनर, पोस्टर लगाये गये व पर्चिया भी वितरित की गयी। गुठलियों की उपयोगिता विषयक गोष्ठी- अक्सर हम फल खाकर उनके बीज (गुठलियाॅ) को इधर उधर फेंक देते हैं। जबकि बहुत से फलों की गुठलियाॅ हमारे लिए लाभ दायक सिद्ध हो सकती है। आम, महुआ, कटहल जामुन, बेर, नीम, आवला आदि ऐसे फल है जिनकी गुठलियाॅ ंके रस से आयुवेदिक तेल बनाये जाते हैं। हम इन्हें इकठ्इा कर धनोपार्जन भी कर सकते हैं। संस्था द्वारा उपयुक्त विषयक गोष्ठी का आयोजन बासॅगाॅव में किया गया है। इसमें ग्रामीण अंचल के 150 लोगों ने भाग लिया। महिला साक्षरता- आज भी हमारे देश में पुरूष साक्षरता के सापेक्ष महिला साक्षरता का प्रतिशत कम है। शिक्षा का विकास होने के बावजूद भी मलिन बस्तियों के गरीब लड़कियों को पढ़ाने में रूचि नहीं रखते। संस्था ने महिलाओं व गरीब लड़कियों को साक्षर बनाने के निमित्त, उत्तटोला, गंगा टोला में निःशुल्क शिक्षित करने की व्यवस्था कर रखी है। सांय कालीन कक्षाएॅ संचालित है जिससे गरीब काम से छूट्टी पाकर वहाॅ आये और शिक्षित बनें। जल संरक्षण- लगातार हो रहे जलादोहन व प्रदूषण के चलते जलस्तर गिरता जा रहा है। जलाशय सूखते जा रहे है। नदियों का जल तलहटी में समाता चला जा रहा है। इस बचाव के लिए जल संरक्षण अति आवश्यक हो गया है। संस्था ने शिविर के माध्यम से लोगों को जागरूक करने व जलादोहन को रोकनने के प्रति सजग रहने का विचार दिया। संस्था द्वारा ग्रामसभा पिड़िया में एक दिवसीय जल संरक्षण गोष्ठी का आयोजन किया गया। ताल पोखरी की साफ सफाई से होने वाले लाभ से लोगों को अवगत कराया गया। ऐसे में भूगर्भ शास्त्री, वैज्ञानिक व समाज सेवी लोगों ने अपने-2 विचार रखें। प्रशिक्षण कार्यक्रम- संस्था द्वारा भरौली बाजार, माल्हनपार बाजार, सुड़ियाकुआॅ, अधियारी बाग, गांगा टोला में प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया है जहाॅ पर साधारण सिलाई, कढ़ाई, बुनाई पेंटिंग, वाल पेटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। टेक्निकल प्रशिक्षण- संस्था द्वारा बेरोजगार युवक युवतियों को रोजगार से जोड़ने के निमित्त व्यूटी पार्लर, रेडियों मरम्मत, कम्प्यूटर मरम्मत, बढ़ई गरीबी, टेराकोटा मेंकिग आदि का प्रशिक्षण दिलाया जाता है। पार्लर की बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएॅ व्यूटी पार्लर कोर्स करने की इच्छुक है। मेन्स, ओमेन्स पार्लर दोनों की मांग दिन दिन बढ़ रही है। जिस कारण यह कोर्स महिलाओं के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है। अल्पसंख्यक जागरूकता कार्यक्रम व प्रशिक्षण कार्यक्रम- महिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा बासगाॅव ब्लाक के बभनौली व मन्झरिया ग्रामसभा की अल्पसंख्ययक गरीब महिलाओं के लिए बभनौली ग्रामसभा में दिनांक 30 जनवरी 2015 को जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस क्रम में ग्राम विरई, रउजा व घुरियापार में अल्पसंख्यक गरीब व महिलाओं के लिए सिलाई कढाई व पेन्टिंग का प्रशिक्षण चलाया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम विरई में दि0 15.08.2014 से 14.10.2014 तक, रउजा में दि0 02.11.2014 से 31.12.2014 तक व धुरियापार में दि0 01.01.2015 से 28.02.2015 तक चलाया गया जिसमें 125 महिलाएॅ लाभान्वित हुई। पर्यावरण जागरूकता शिविर- सोहरतगढ़ एनवायरमेन्टल सोसायटी सोहरतगढ़ के सौजन्य से गोरखपुर के चक्साहुसेन पचपेड़वा में एक दिवसीय पर्यावरण जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मलिन बस्ती की महिलाओं पुरूषों ने भाग लिया। इस अवसर पर वार्ड ने पार्षद, व सोहरतगढ़ एनवायरमेन्टल सोसायटी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर पेड़ भी लगाए गये। ग्रामीण स्वच्छता एवं शौचालय- शहरी की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता का अभाव नजर आता है। आज भी लोग घर के कचरे घर के पास ही डालते हैं। शौचालय के लिए खेत में ही जाना पसन्द करते है। संस्था द्वारा लोगों को ग्रामीण स्वच्छता एवं शौचालय के प्रति जागरूक करने के लिए भुसवल ग्रामसभा में एक शिविर का आयोजन कर कूड़ा कचरा घर से दूर गढ़ा बनाकर डालने व घर-2 शौचालय बनाकर उसका प्रयोग करने पर जोर दिया गया। 2014-15 में संस्था के प्रयन्त से चानपार, चइेतरा मन्झरिया, दुबौली, माल्हनपार के गरीबों के लिए 150 से उपर शौचालय का निर्माण कराया गया जनसंख्या वृद्धि के साथ ही शौचालय की परम्परा चालू की गयी। सरकार भी इस तरफ ध्यान दे रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रम- संस्था द्वारा प्रति वर्ष की भाॅति इस वर्ष भी 15 अगस्त 2014 व व 26 जनवरी 2015 को ध्वारोहण के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं व बच्चों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। खेल-कूद कार्यक्रम- संस्था द्वारा प्रति वर्ष खेल कूद कार्यक्रम कराया जाता है। 2014-15 में माल्हनपार में खेल कूद कार्यक्रम कराया गया जिसमें सैकड़ों बच्चों ने भाग लिया। विजेताओं को प्रमाण पत्र व शील्ड प्रदान किया गया। विकलांग कल्याण कार्यक्रम- संस्था द्वारा विकलांगों के कल्याण के लिए उन्हें शिविर के माध्यम से आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराये जाते हैं। संस्था द्वारा हटंवार बाजार मंे दि0 15.01.2015 को शिविर का आयोजना कर विकलांगों को ट्राई सायकल, कान मशीन, बनावटी हाथ आदि वितरित किया गया। समाज कल्याण कार्यक्रम- संस्था द्वारा गौरी बाजार में सामाजिक कल्याण से सरोकार शिविर का आयोजन कराया गया। महिलाओं व बच्चों का स्वास्थ्य परिक्षण कराकर उन्हें निः शुल्क दवा का वितरण भी किया गया। राष्ट्रीय एकीकरण कार्यक्रम- आज जब कि क्षेत्रवाद, जातिवाद, धर्मवार, सम्प्रदाय वाद आदि से देश क्षत विक्षत हो रहा है। राष्ट्रीय एकीकरण की विचाराधारा को बल देना आवश्यक होता रहा है। हम एक है की अनुभूति कराना जरूरी हो गया है। संस्था द्वारा दि0 25.08.2014 को माल्हनपार बाजार में एक शिविर का आयोजन कर हम एक है पर बल दिया गया । जन-धन योजना-संस्था को सहायक निदेशक हस्तशिल्प कार्यालय विकास आयुक्त हस्तशिल्प, वस्त्र मंत्रालय,भारत सरकार के निर्देशानुसार 2000 आर्टिजनों को जन-धन योजना अन्तर्गत खाता खोलवाने का निर्देश प्राप्त हुआ था जिसे संस्था गोरखपुर जनपद में मु0 गोरखनाथ, रसुलपुर, मोहलालपुर, पिपरापुर, घासीकटरा, मिर्जापुर, जाफरा बाजार, अबू बाजार, गंगानगर, मोती पोखरा, नकहा नं0 1, व देवरिया जनपद में परशुराम धमउर, मस्टोडरगिर मठिया, सोमनाथ, अबू बकर नगर, भटवलिया, देवरिया खास, रामनाथ देवरिया इत्यादि मुहल्लों के हस्तशिल्पियों का खाता खुलवाया गया। उपसंहार- संस्था वर्ग भेद, जाति भेद, सम्प्रदाय भेद, धर्म भेद से उपर उठकर सर्वसमाज के हित व विकास के लिए कार्य करने को दृढ़ सकल्प है। संस्था सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के लिए कार्य करती है और सदैव करती रहेगी। गरीबों को न्याय, खाना-कपड़ा,मकान की अवधारणा की सफल बनाने में लगी हुई है।